परमाणु बम का इतिहास शुरुआत से आजतक | Parmanu Bomb in Hindi

परमाणु बम ऐसे बम होते है जो nuclear reaction की वजह से बहुत छोटे होने के बावजूद भी बहुत बड़े धमाके कर सकते हैं। यह बम Nuclear fusion (नाभिकीय संलयन) या Nuclear fission (नाभिकीय विखण्डन) या फिर इन दोनों प्रकार के reactions के मेल से बनाए जा सकते हैं।

परमाणु बम Parmanu Bomb

परमाणु बम का इतिहास शुरुआत से आजतक – Parmanu Bomb in Hindi

परमाणु बम विकसित करने की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने की थी। अमेरिका परमाणु बम बनाने में सफल हो गया और उसने अपने दुश्मन देश जापान के दो शहरों पर परमाणु बम गिरा दिए, जिन्होंने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया। यह आखिरी मौका था जब परमाणु बमों का इस्तेमाल किया गया।

तब से लेकर अब तक कई देशों ने सुरक्षा और कूटनैतिक नज़रिए से परमाणु बमों का विकास करना शुरू कर दिया। नीचे दी गई timeline आपको परमाणु बम के इतिहास को अच्छी तरह से समझने में सहायता करेगी-

1941 से 1950 तक

अगस्त 1942 – अमेरिका ने शुरू किया मैनहटन प्रोजेक्ट

अमेरिका ने परमाणु हथियार बनाने के लिए मैनहटन परियोजना की शुरूआत की। इस परियोजना पर लगभग 1,30,000 लोगों ने काम किया और उस समय इस पर लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर का खर्च आया था। उस समय के 2 अरब अमेरिकी डॉलर आज के 28 अरब डॉलर यानि कि करीब 2 लाख करोड़ भारतीय रूपए के बराबर हैं।

16 जुलाई 1945 – अमेरिका ने पहला परमाणु परीक्षण किया

अमेरिका ने अपने New Mexico राज्य में अपना और दुनिया का पहला परमाणु परीक्षण किया। इस परमाणु परीक्षण का code name “ट्रिनिटी” (Trinity) रखा गया। Trinity शब्द का हिन्दी में अर्थ होता है – ‘त्रिमूर्ति’। इस दिन को परमाणु युग की शुरूआत कहा जाता है।

6 अगस्त 1945 – अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने दुश्मन देश के एक शहर हिरोशिमा पर यूरेनियम पर आधारित परमाणु बम गिरा दिया। इस बम धमाके के कारण लगभग 1,40,000 लोगों की मौत हुई और कई हज़ार लोग बाद में रेडिएशन से संबंधित बिमारियों से ग्रस्त हुए और मारे गए।

9 अगस्त 1945 – अमेरिका ने नागासाकी पर परमाणु बम गिराया

हिरोशिमा पर बम गिराने के ठीक तीन दिन बाद अमेरिका ने जापान के एक और शहर नागासाकी पर प्लूटोनियम पर आधारित परमाणु बम गिराया। इस बम के कारण लगभग 75,000 लोग मारे गए और कई रेडिएशन से संबंधित बिमारियों से ग्रस्त हुए।

24 जनवरी 1946 – संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु हथियारों को खत्म करने की मांग की

दूसरे विश्व युद्ध के बाद गठित हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अपनी महासभा के पहले प्रस्ताव में परमाणु हथियारों को बिलकुल खत्म करने की मांग की। इसके सिवाए एक आयोग का गठन भी किया गया, जो युद्ध के लिए परमाणु खोजों की समस्या से निपट सके।

9 अगस्त 1949 – भूत-पूर्व रूस ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया

सोवियत संघ, यानि कि भूत-पूर्व रूस ने कजाकिस्तान के सेमिपालाटिंस्क में अपने पहले परमाणु धमाके का परीक्षण किया। इसका कोड नेम “First Lightning” था। इस तरह से यह दूसरा देश बना जिसने परमाणु हथियार का विकास करके उसका सफल परीक्षण किया।

1951 से 1960 तक

3 अक्तूबर 1952 – ब्रिटेन ने परमाणु हथियार का परीक्षण किया

ब्रिटेन यानि के इंग्लैंड ने अपनी territory ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तटों से थोड़ी दूर स्थित मोंटेबेल्लो द्वीप समूह पर अपना पहला सफल परमाणु परीक्षण आयोजित किया। इसके बाद इंग्लैंड ने दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में दो और भी परमाणु परीक्षण किए थे।

1 नवंबर 1952 – अमेरिका ने पहले हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया

अमेरिका ने परमाणु हथियारों की दौड़ में आगे बढ़ते हुए मार्शल द्वीप समूह पर हाइड्रोजन पर आधारित परमाणु बम का सफल परीक्षण किया। यह बम नागासाकी शहर पर गिराए गए बम से 500 गुना ज्यादा शक्तिशाली था।

1 मार्च 1954 – अमेरिका एक बड़ा परमाणु परीक्षण करता है

अमेरिका प्रशांत महासागर में 17 मेगाटन के एक विशाल हाइड्रोजन बम का परीक्षण करता है। इस बम को “Bravo” नाम दिया गया था। इसकी वजह से जापान का एक बड़ा मछली पकड़ने वाला जहाज़ और कई द्वीप समूह दूषित हो गए थे, जिसकी वजह से वहां के निवासियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

9 जुलाई 1955 – रसेल आइंस्टीन ने घोषणापत्र जारी किया

बर्ट्रेंड रसेल और अल्बर्ट आइंस्टीन समेत अन्य प्रमुख वैज्ञानिकों ने परमाणु युद्ध के ख़तरों की चेतावनी देता एक घोषणापत्र जारी किया और उन्होंने सभी देशों की सरकारों से विवादों को शांतिपूर्वक तरीके से हल करने का आग्रह किया।

17 फरवरी 1958 – ब्रिटेन ने निशस्त्रीकरण अभियान की शुरूआत की

ब्रिटेन ने निशस्त्रीकरण अभियान की शुरूआत की, जिसके तहत इस बात पर जोर दिया गया कि सभी देशों के बीच परमाणु हथियारों की दौड़ खत्म होनी चाहिए।

1 दिसंबर 1959 – अंटार्कटिका में परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध

1 दिसंबर 1959 को अंटार्कटिका में खोज कार्य कर रहे 12 देशों के वैज्ञानिकों ने एक संधि की। जिसकी कई शर्तों में एक बात यह भी शामिल थी कि कोई भी देश अंटार्कटिका पर परमाणु परीक्षण नहीं करेगा और ना ही कोई देश इसमें अपने परमाणु कचरे को डंप करेगा।

13 फरवरी 1960 – फ्रांस का परमाणु परीक्षण

फ्रांस अपने ग़ुलाम देश अल्जीरिया के सहारा रेगिस्तान वाले क्षेत्र में अपना पहला परमाणु विस्फोट करता है। इसके बाद फ्रांस अपने परमाणु परीक्षणों को दक्षिणी प्रशांत में ले जाता है जो कि 1996 तक जारी रहते हैं।

1961 से 1970 तक

30 अक्तूबर 1961 – सबसे बड़ा बम परीक्षण

सोवियत संघ यानि कि भूत-पूर्व रूस अब तक के सबसे शक्तिशाली परमाणु बम का परीक्षण करता है जो कि लगभग 58 मेगाटन का होता है। इस बम को ‘Tsar Bomba’ नाम दिया गया था।

16 से 29 अक्टूबर 1962 – क्यूबा मिसाइल संकट

अमेरिका और रूस में तनाव उस समय चरम सीमा तक पहुँच जाता है जब अमेरिका को पता चलता है कि उसके पास स्थित देश क्यूबा में सोवियत रूस ने मिसाइलों की तैनाती कर रखी है। इसके बाद पूरे 13 दिन (16 से 29 अक्टूबर 1962) तक अमेरिका क्यूबा की नाकेबंदी कर लेता है। इस वजह से रूस और अमेरिका दोनों परमाणु युद्ध की कगार पर आ जाते हैं।

5 अगस्त 1963 – Partial Nuclear Test Ban Treaty

यूरोप और अमेरिका के आम नागरिकों के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद रूस की राजधानी Moscow में एक संधि हुई। जिसके तहत यह सुनिश्चित किया गया कि वायुमंडल, अंतरिक्ष और पानी के नीचे परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाया जाए।

16 अक्तूबर 1964 – चीन का पहला परमाणु परीक्षण

चीन ने अपने सिंकियांग राज्य के लोप नॉर (Lop Nor) नामक स्थान पर अपना पहला परमाणु विस्फोट किया। इसके बाद चीन ने इसी स्थान पर 23 परमाणु परीक्षण वायुमंडल में भी किए और 22 परीक्षण भूमि के नीचे भी किए।

14 फरवरी 1967 – लातीनी अमेरिका परमाणु मुक्त हुआ

लातीनी अमेरिका के देशों ने एक संधि की जो कि मेक्सिको देश की राजधानी मेक्सिको सिटी में आयोजित हुई। इस संधि में सभी देश परमाणु हथियारों के निर्माण और परीक्षण ना करने पर सहमत हुए।

1 जुलाई 1968 – परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty)

जिन देशों ने परमाणु हथियार विकसित नहीं किए थे, उन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत उन्होंने तय किया कि वो कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने के लिए कोई भी तरीका नहीं अपनाएंगे।

1971 से 1980 तक

8 मई 1974 – भारत का पहला परमाणु परीक्षण

भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया। यह एक भूमिगत परमाणु परीक्षण था जिसे “Smiling Buddha” नाम दिया गया। यह इसलिए किया गया था क्योंकि कुछ देश भारत को आँख दिखा रहे थे।

22 सितंबर 1979 – हिंद महासागर में परमाणु विस्फोट

दक्षिण हिंद महासागर में एक परमाणु विस्फोट हुआ, जिसे लेकर किसी देश ने दावा नहीं किया। माना जाता है कि यह विस्फोट दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल की सहायता से किया था।

1981 से 1990 तक

12 जून 1982 – निशस्त्रीकरण के लिए 10 लाख लोगों की रैली

परमाणु हथियारों के विरोध में न्यूयॉर्क शहर के सेंट्रल पार्क में दस लाख लोग रैली करते हैं। यह निशस्त्रीकरण के लिए हुई इतिहास की सबसे बड़ी रैली है।

6 अगस्त 1985 – दक्षिण प्रशांत की परमाणु संधि

न्यूजीलैंड के पास स्थित Cook Islands में एक संधि होती है जिसके अनुसार दक्षिण प्रशांत को Nuclear Free Zone घोषित किया गया। यह संधि इस क्षेत्र में परमाणु हथियार के निर्माण, स्टेशनिंग और परीक्षण पर रोक लगाती है।

30 सितंबर 1986 – इजराइल के परमाणु कार्यक्रम का खुलासा

ब्रिटेन के एक अख़बार ‘The Sunday Times’ में एक खबर छपती है जो यह बताती है कि उन्हें इजराइल के एक nuclear technician के हवाले से पता चला है कि इजराइल के पास 200 से ज्यादा परमाणु हथियार हो सकते हैं।

1991 से 2000 तक

10 जुलाई 1991 – दक्षिण अफ्रीका ‘गैर-प्रसार संधि’ (Non-Proliferation Treaty) में शामिल हो गया

दक्षिण अफ्रीका भी गैर-प्रसार संधि से जुड़ गया। इस देश की सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 6 परमाणु बम बनाए थे, जिन्हें उन्होंने नष्ट कर दिया है।

15 दिसंबर 1995 – दक्षिण-पूर्व एशिया परमाणु हथियार मुक्त हुआ

दक्षिण-पूर्व एशिया के देश मिलकर एक nuclear-weapon-free zone का निर्माण करते हैं। यह zone पश्चिम में म्यांमार से लेकर पूर्व में फिलीपींस तक और उत्तर में लाओस और वियतनाम से लेकर दक्षिण में इंडोनेशिया तक होता है।

11 अप्रैल 1996 – अफ्रीका महाद्वीप परमाणु मुक्त क्षेत्र बना

43 अफ्रीकी देशों के अधिकारी मिस्र में पेलिंडाबा की संधि की स्थापना करते है जो अफ्रीका महाद्वीप को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए वचनबद्ध होते है। सभी देश वादा करते है कि वो परमाणु हथियारों का निर्माण, परीक्षण या भंडार नहीं करेंगे।

8 जुलाई 1996 – अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने परमाणु हथियारों को अवैध घोषित किया

अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने घोषित किया कि परमाणु हथियारों का प्रयोग या धमकी देना अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत होगा।

24 सितंबर 1996 – परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि

संयुक्त राष्ट्र में एक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty) की शुरूआत होती है जो परमाणु परीक्षणों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाती है। चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और अमेरिका इस संधि पर हस्ताक्षर करते हैं। भारत इस संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर देता है।

मई 1998 – भारत और पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करते हैं।

24 साल बाद भारत तीन भूमि-गत परमाणु परीक्षण करता है जिनमें से एक थर्मोन्यूक्लियर होता है। इस परमाणु परीक्षण पर हाल ही में ‘परमाणु’ नाम की एक फिल्म भी बन चुकी है। इसके बाद पाकिस्तान भी 6 परमाणु हथियारों का परीक्षण करता है।

2001 से 2010 तक

9 अक्तूबर 2006 – उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण करता है

उत्तर कोरियाई सरकार यह घोषणा करती है कि उसने सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण कर लिया है। इस तरह से ऐसा करने वाला यह दुनिया का 8वां देश बन जाता है। इस परीक्षण की दुनियाभर में निंदा होती है।

30 अप्रैल 2007 – ICAN की स्थापना

ऑस्ट्रेलिया में परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई। इसे ‘International Campaign to Abolish Nuclear Weapons’ (ICAN) कहा गया। यह अभियान परमाणु शक्ति संपन्न देशों को परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए बातचीत शुरूआत करने की पहल करने को कहता है।

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Sources


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  1. Khushbu Gupta

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