Map Projection या मानचित्र प्रक्षेप क्या होता है?

Map Projection जिसे हिंदी में मानचित्र प्रक्षेप कहा जाता है एक ऐसी विधी है जिसमें पूरी धरती या इसके किसी एक हिस्से को अक्षांश और देशांतरों की सहायता से किसी समतल कागज़ या जगह पर बनाया जाता है। लगभग सभी नक्शे Map Projection की सहायता से ही तैयार किए जाते हैं।

प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता J.A. Steers ने Map Projection की परिभाषा कुछ इस तरह से दी है-

मानचित्र प्रक्षेप ग्लोब की अक्षांश व देशान्तर रेखाओं को सपाट कागज पर प्रदर्शित करने की एक विधि है। (Map projection is a means of representing the lines of latitude and longitude of the globe on a flat sheet of paper.)

अक्षांशों को हम अंग्रेज़ी में Parallels/Latitudes भी कह देते है और ये भू-मध्य रेखा से पृथ्वी की किसी जगह की कोणीय दूरी होती है।

देशांतर या Meridian/Longitudes ग्रीनविच मेरिडियन के पूर्व या पश्चिम की जगह की कोणीय दूरी को कहते हैं।

Map Projection कितने प्रकार की होती हैं? Types of Map Projections

Map Projection अनेक तरह की होती है। इन्हें प्रमुख तौर पर निचले 3 भागों में बांटा गया है, जिनके आगे कई प्रकार हैं।

  1. प्रकाश के प्रयोग के अनुसार (with the help of light)
  2. प्रयोजन के अनुसार (According to purpose) या निश्चित गुणों के अनुसार
  3. रचना विधि के अनुसार या विकासनीय पृष्ठ के आधार पर

1. प्रकाश के प्रयोग के अनुसार (with the help of light)

प्रकाश के प्रयोग के अनुसार Map Projections दो प्रकार की होती हैं-

A) Perspective (Geometrical/संदर्श प्रक्षेप/रेखागणितीय प्रक्षेप) – इस तरीके में ग्लोब की अक्षांश और देशांतर रेखाओ को किसी प्रकाशमान बिंदू से कागज़ पर उतारा जाता है। प्रकाश की स्थिती के हिसाब से संदर्श प्रक्षेपों को आगे के 3 भागों में बांटा गया है-

a) Gnomonic Projection – जब प्रकाश ग्लोब के केंद्र पर स्थित हो तो वो नोमोनिक प्रक्षेप कहलाती है।

b) Stereographic Projection – प्रकाश ग्लोब के व्यास के एक सिरे पर हो तो वो स्टिरीयोग्राफिक प्रक्षेप कहलाती है।

c) Orthographic Projection – जब प्रकाश ग्लोब से बाहर अनंत (Infinity) दूरी पर स्थित हो तो ओरथोग्राफिक या लंब रेखीय प्रक्षेप बनते हैं।

B) Non-Perspective (असंदर्श प्रक्षेप) – इन प्रक्षोपों में अक्षांश व देशांतर रेखाओं की रचना प्रकाश की सहायता की अपेक्षा गणित द्वारा की जाती है। इन प्रक्षेपों में ग्लोब के किसी न किसी गुण को शुद्ध रखा जाता है इसलिए इनका उपयोग अधिक होता है।

2. प्रयोजन के अनुसार (According to purpose) या निश्चित गुणों के अनुसार

वैसे ग्लोब के किसी भी हिस्से को बिलकुल सटीक तरीके से कागज़ पर नही बनाया जा सकता, जिसका कारण है कि कागज़ समतल होता है जबकि ग्लोब का हर भाग गोल होता है। लेकिन अपने काम के लिए किसी नक्शे या Map Projection में कुछ विशेष चीज़ों को सटीक तरीके से बनाया जा सकता है, अर्थात् अपने प्रयोजन (Purpose) के लिए खास तरह की Map Projections बनाई जा सकती है।

प्रयोजन के अनुसार Map Projections प्रमुख रूप से तीन प्रकार की हैं-

A) Equal Area Projection (Homolographic, समक्षेत्रफल प्रक्षेप) – इस तरह की Projections में ग्लोब के प्रदर्शित किए जाने वाले भाग का क्षेत्रफल सही अनुपात में बराबर रखा जाता है। इससे क्षेत्रफल तो सही पता लग जाता है लेकिन दिशा की स्थिती में परिवर्तन आ जाता है। विभिन्न वस्तुओं के वितरण, जनसंख्या वितरण और राजनीतिक मानचित्र को बनाने के लिए इस तरह के प्रक्षेपों की सहायता ली जाती है।

B) Equidistant Projection (True shape/Orthomorphic/यथाकृतिक प्रक्षेप) – Equal Projections में जहां क्षेत्रफल को सही अनुपात में रखा जाता तो वहीं Equidistant Projection में ग्लोब के किसी भी भाग की आकृति को वैसा ही रखा जाता है, जैसे कि वो ग्लोब पर दिखती है। ऐसे प्रक्षेपों में आकृति की रक्षा करते हुए क्षेत्रफल को शुद्ध रख पाना असम्भव है।

C) Conformal (समांतराली, शुद्ध दिशा या दिशंगीय प्रक्षेप) – Conformal Projection में चित्र के केंद्रबिंदू से सभी और की दिशाएं उसी प्रकार से होती हैं, जैसे धरती पर। इन प्रक्षेपों में दो स्थानों को मिलाने वाली सीधी रेखा की दिशा ग्लोब के अनुसार ही शुद्ध होती है।

3. रचना विधि के अनुसार या विकासनीय पृष्ठ के आधार पर (According to construction)

इस तरह की प्रक्षेपों को ज्यादा सटीक माना जाता है। इसमें हम चार तरह की Projections का अध्ययन करेंगे-

Conical Map Projection in Hindi

A) Conical Projection (शंकु प्रक्षेप) – Conical Projection में एक कागज़ को इस प्रकार से काटा जाता है कि वो एक शंकू की शकल धारण कर ले। फिर उस शंकू को एक ग्लोब के ऊपर रखा जाता है। ग्लोब के ऊपर रखते समय ये ध्यान रखा जाता है कि शंकू का तीखा शीर्षबिंदू ग्लोब के ध्रुव के बिलकुल ऊपर हो, नही तो Projection सही नहीं बनेगी। ऐसा करने पर शंकू का जो भाग जिस भी अक्षांश को छूता है उसे मानक अक्षांश (Standard Parallel or S.P) कहते हैं। इसके बाद शंकू पर प्रकाश डालकर देशांतरो और अक्षांशो को कागज़ पर उकेर दिया जाता है। इस तरह से प्राप्त Projection में अक्षांश रेखाएं चाप के रूप में होती है जबकि देशांतर रेखाएं शंकू के शीर्षबिंदू पर मिलने वाली सीधी रेखाएं होती हैं। ध्यान रहे अगर शंकू का शीर्षबिंदू धुरी के ऊपर ना रहे तो अक्षांश रेखाएं चाप के रूप में नही प्राप्त होंगी।

Conical Projection को Perspective या Non-Perspective किसी भी केस में बनाया जा सकता है। इस पर पूरे विश्व के मानचित्र को बनाना कठिन होती है। इसमें एक समय में केवल एक गोलार्ध को ही दिखा सकते हैं।

शंकू प्रक्षेप के कुछ प्रमुख प्रकार-

a) Simple conical projection with one S.P.
b) Simple conical projection with two S.P.
c) Bonne’s Projection
d) Polyconic Projection
e) International Map Projection

Cylindrical Projection in Hindi

B) Cylindrical Projection (बेलनाकार प्रक्षेप) – Cylindrical Projection में कागज़ का एक बेलन बना लिया जाता है और उसे ठोस मानकर किसी ग्लोब पर चढ़ाया जाता है। इस तरह से कागज़ सबसे बड़े चक्र अर्थात भू-मध्य रेखा को छूता है। इसके बाद ये मान लिया जाता है कि ग्लोब के मध्य में प्रकाश रखा है। फिर प्रकाश की सहायता से अक्षांशो और देशान्तरों को उस पर खीच लिया जाता है।

इस तरह से एक आयताकार मानचित्र प्राप्त होगा जिसमें अक्षांश रेखाओं की दूरी भू-मध्य रेखा से ध्रुवो की तरफ जाने पर बढ़ती जाएगी।

बेलनाकार प्रक्षेप के कुछ प्रमुख प्रकार-

a) Simple Cylindrical Projection
b) Cylindrical Equal Area or Homolographic Projection
c) Mercator’s Projection

Zenithal Projection

C) Zenithal Projection (खमध्य प्रक्षेप) – इस तरह की Projection में समतल कागज़ पर ही ग्लोब को रखा जाता है और किसी बिंदू से प्रकाश डाल कर अक्षांशो और देशांन्तरों का रेखाजाल प्राप्त किया जाता है। ये तीन तरह से किया जा सकता है-

a) जब समतल तल ग्लोब के किसी एक ध्रुव को स्पर्श करे तो उसे Polar Zenithal Projection कहते हैं।
b) जब समतल तल ग्लोब की भूमध्य रेखा पर किसी बिंदु पर स्पर्श करता है तो उसे Equatorial Projection कहते हैं।
c) जिस समय समतल धरातल ग्लोब को भूमध्य रेखा और ध्रुव के अतिरिक्त इनके बीच किसी बिंदु पर स्पर्श करता है तो उसे Oblique Zenithal Projection कहते हैं।

D) Conventional Projection (परम्परागत या रूढ़ प्रक्षेप) – ये Non-Perspective टाइप के Projection होते है। इनमें गणनाओं की मदद से बिना प्रतिबंब डाले मानचित्र को बनाया जाता है। किसी विशेष काम के लिए ही ये प्रक्षेप बनाए जाते है। इनको बनाना काफी मुश्किल होता है लेकिन इनका उपयोग बाकी तरह के प्रक्षेपों से ज्यादा होता है और इन पर पूरे संसार का मानचित्र बनाया जाता है।

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  1. Anamika jaiswal

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