सिकंदर की 9 सच्चाईयां जो उसके विश्व विजेता होने के भ्रम को तोड़ देगीं।

सिकंदर के बारे में – About Alexander The Great in Hindi

sikandar

शायद सिकंदर इतिहास का पहला राजा था जिसने पूरी दूनिया को जीतने का सपना देखा। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वह ग्रीस से मिस्त्र, सीरिया, बैक्ट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान और वर्तमान पाकिस्तान को जीतता हुआ व्यास नदी तक आ पहुँचा।

इतिहास में भले ही यह पढ़ाया जाता है कि सिकंदर की सेना लगातार युद्ध करके थक चुकी थी और आगे और युद्ध नहीं लड़ना चाहती थी। इस बात में थोड़ी बहुत सच्चाई हो सकती है परंतू असली वजय तो यह थी कि व्यास नदी के आगे हिंदू गणराज्यों और जनपदों ने उसकी एक ना चलने दी और उसे वापिस जाने पर मज़बूर कर दिया।

सिकंदर के विजयी अभियान को दौरान उसके इतिहासकार उसके साथ रहते थे जो उसकी सफ़लताओं को बढ़ा – चढ़ा कर लिख देते थे, अत्याचारों को छुपा देते, और हारों को जीत में बदल कर लिख देते थे।

पर आज हम आपको इस तथाकथित विश्वविजेता के जीवन और युद्धों के बारे में 8 सच्चाईयां बताएंगे जो आपकी नज़र में इसके महान होने के भ्रम को तोड़ देगीं।

1. अपने भाइयों को मारकर बना था राजा

सिकंदर का जन्म 356 ईसवी पूर्व में ग्रीक के मकदूनिया (मेसोडोनिया) में हुआ था। उसका पिता फिलिप मकदूनिया का राजा था जिसने कई शादियां की थी।

336 ईसवी पूर्व में सिकंदर जब 19-20 साल का था तो उसके पिता फिलिप की हत्या कर दी गई। ऐसी भी कहा जाता है कि सिकंदर की मां ओलंपिया ने ही जह़र देकर अपने पति की हत्या करवाई थी।

अपने पिता की मृत्यु के पश्चात सिकंदर ने राजगद्दी पाने के लिए अपने सौतेले और चचेरे भाईयों का कत्ल कर दिया और मकदूनिया का राजा बन गया।

2. अरस्तू ने दिखाया था दुनिया जीतने का सपना

सिकंदर का गूरू अरस्तू था जो एक बहुत ही प्रसिद्ध और महान दार्शनिक था। अरस्तू के महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज पूरी दुनिया में जहां – जहां भी दर्शनशास्त्र, गणित, विज्ञान और मनोविज्ञान पढ़ाया जाता है उसमें कहीं ना कहीं अरस्तू के विचारों जा वैज्ञानिक अनुभवों का उल्लेख जरूर होता है, भले ही एक – आध लाइन में हो।

सिकंदर जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति को निखारने का काम अरस्तू ने ही किया। कई इतिहासकार मानते हैं कि वह अरस्तू ही था जिसने सिकंदर के मन में पूरी दुनिया जीतने का सपना जगाया।

इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिकंदर के विजयी अभियान के दौरान अरस्तू का भतीजा कलास्थनीज़ भी एक सेनापति के रूप में उसके साथ गया था।

3. ऐसे की थी विजयी अभियानों की शुरूआत

alexandar in hindi

Sikandar Empire

सिकंदर ने सबसे पहले मकदूनिया के आसपास के राज्यों को जीतना शुरू किया। मकदूनिया के आसपास के राज्यों को जीतने के बाद उसने एशिया माइनर (आधुनिक तुर्की) की तरफ कूच किया।

तुर्की के बाद एक – दो छोटे राज्यों को छोड़कर विशाल फ़ारसी साम्राज्य था। फ़ारसी साम्राज्य मिस्त्र, ईरान से लेकर पश्चिमोत्तर भारत तक फैला था। उल्लेखनीय है कि फारस साम्राज्य सिकंदर के अपने साम्राज्य से कोई 40 गुणा ज्यादा बड़ा था।

फारसी साम्राज्य का राजा शाह दारा था जिसे सिकंदर ने अलग- अलग तीन युद्धों में हराकर उसके साम्राज्य को जीता। परंतु शाह दारा ने सिकंदर से संधि कर ली और अपनी एक पुत्री ऱुखसाना का विवाह उससे कर दिया।

फ़ारसी साम्राज्य जीतने में सिकंदर को करीब 10 साल लग गए। विजय के पश्चात उसने बहुत भव्य जुलूस निकाला और अपने आपको विश्व विजेता कहलाना शुरू कर दिया क्योंकि फ़ारस को जीतकर वह उस तमाम भूमि के 60 प्रतीशत हिस्से को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक के लोगों की थी।

भारत तक पहुँचते – पहुँचते उसे शाह दारा के इलावा छोटे – छोटे राज्यों, सूबेदारों और कबीलों से भी युद्ध करना पड़ा जिसमें उसकी जीत हुई।

4. सिकंदर का युद्ध कौशल

यह सिकंदर की योग्यता का ही परिणाम था कि उसकी छोटी सी सेना बड़ी – बड़ी सेनाओ को मात दे दिया करती थी। सिकंदर की युद्ध रणनीतियों को आज भी युरोप की किताबों में पढ़ाया जाता है।

सिकंदर के पत्थर और आग के गोले फेंकने वाले गुलेलनुमा बड़े- बड़े हथियार और उसके सैनिकों की लंबी – लंबी ढ़ालें युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाती थी।

कई ऐसे मौकों पर जब सिकंदर की सेना युद्ध में कमज़ोर पड़ती दिखती तो सिकंदर खुद आगे होकर लड़ता जिससे उसकी सेना का मनोबल बढ़ जाता।

सिकंदर की यवन सेना उसे देवता मानती थी।

5. सिकंदर का भारत पर हमला

sikandar

सिकंदर ने भारत पर 326 ईसा पूर्व में हमला किया था। उस समय भारत छोटे – छोटे राज्यों और गणराज्यों में बंटा हुआ था। राज्यों में राजा शासन करते थे और गणराज्यों के मुखी गणपति होते थे जो प्रजा की इच्छा अनुसार ही फैसले लेते थे।

भारत में सिकंदर का सामना सबसे पहले तक्षशिला के राजकुमार अंभी से हुआ था। अंभी ने शीघ्र ही आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता दी।

सिकंदर अंभी द्वारा भेंट की गई दौलत को देखकर देख दंग रह गया। वह सोच में पड़ गया कि अगर भारत के एक छोटे से राज्य के पास इतनी धन – संपदा है तो पूरे भारत में कितनी होगी ? भारत की धन – संपदा देखकर उसे भारत जीतने की इच्छा ओर बढ़ गई।

इधर तक्षशिला विश्वविद्यालय के एक आचार्य चाणक्य से भारत पर किसी विदेशी का हमला देखा ना गया। चाणक्य ने भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से सिकंदर के विरूद्ध लड़ने का आग्रह किया, परंतू सभी राजा अपनी आपसी दुश्मनी की वजह से एक साथ ना आए।

चाणक्य ने सबसे शक्तिशाली राज्य मगध के राजा धनानंद से भी गुहार लगाई, परंतू उसने चाणक्य का अपमान कर महल से निकाल दिया।

इसके बाद चाणक्य ने गणराज्यों से एक होने की अपील की जिसमें वह काफी सफल रहे, इन गणराज्यों ने वापसी के समय सिकंदर को बहुत नुकसान पहुँचाया।

6. सिकंदर और पोरस का युद्ध

सिकंदर का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध झेलम नदी के तट पर राजा पुरू या पोरस से हुआ। इस युद्ध को ‘पितस्ता का युद्ध‘ या ‘हाइडेस्पेस का युद्ध‘ कहा जाता है।

महाराजा पुरू सिंध -पंजाब सहित एक बहुत बड़े भू – भाग के स्वामी थे और अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे।

सिकंदर की सेना को झेहलम नदी पार करके पोरस से युद्ध करना था परंतु वर्षा के मौसम के कारण नदी में बाढ़ आई हुई थी और नदी को पार करना मुश्किल था।

पर रात में किसी तरह यवन सेना नदी के पार पहुँच गई। नदी के उस पार राजा पुरू भी 30,00 पैदल सैनिकों, 4,000 घोड़सवारों, 300 रथों और 200 हाथियों के साथ सिकंदर के स्वागत के लिए तैयार खड़े थे।

सिकंदर ने महाराज पोरस के पास एक संदेश भिजवाया जिसमें पोरस को अधीनता स्वीकार करने को कहा पर पोरस ने ऐसा नहीं किया।

इसके बाद दोनो सेनाओं में भयंकर युद्ध शुरू हुआ। राजा पुरू जिसे स्वयं यवन 7 फुट से ऊपर का बताते है, अपनी शक्तिशाली सेना के साथ यवन सेना पर टूट पड़े। पोरस के हाथियों ने यूनानियों का जिस भयंकर रूप से संहार किया उससे सिकंदर और यवन घबरा गए।

युद्ध के पहले ही दिन सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली। इस युद्ध के बाद सिकंदर की सेना का मनोबल टूट गया। सिकंदर ने भी अनुभव किया कि वो पोरस को हरा नहीं सकेगा और लड़ाई जारी रख के अपना ही नुकसान कर लेगा। अंतः उसने पोरस को युद्ध रोकने का प्रस्ताव भेजा जिसे पोरस ने मान लिया।

दोनों पक्षों में संधि हुई जिसके अनुसार पोरस सिकंदर को आगे आने वाले युद्ध अभियानों में सहायता करेगा और बदले में जीते हुए राज्यों पर पोरस शासन करेगा।

7. सिकंदर के सैनिकों के हौसले हुए पस्त

पोरस से युद्ध के बाद सिकंदर की सेना छोटे हिंदु गणराज्यों से भिड़ी। इसमें कठ गणराज्य के साथ हुई लड़ाई काफी बड़ी थी। कठ जाति के लोग जिन्हें कथेयोई या कथा जाति भी कहा गया है, अपने साहस के लिए सर्वप्रसिद्ध थी। कठों ने एक बार तो यवनों के छक्के छुड़ा दिए थे, लेकिन कम संख्या के कारण उन्होंने हार का मुंह देखना पड़ा।

कठों से युद्ध लड़कर यवन सेना व्यास नदी तक पहुंच ही पाई थी कि उसने आने बढ़ने से मना कर दिया। उन्होंने सुन रखा था कि व्यास नदी के पार नंदवंशी राजा के पास 20 हज़ार घुड़सवार सैनिक, 2 लाख पैदल सैनिक, 2 हज़ार चार घोड़े वाले रथ और लगभग 6 हज़ार हाथी थे। इतनी विशाल सेना के बारे में सुनकर वह घबरा गए। पंजाब में उन्हें जिस विरोध का सामना करना पड़ा उससे उन्हें ज्ञात हो गया होगा कि भविष्य में उन्हें किस प्रकार के युद्ध लड़ने होंगे। पंजाब के छोटे-छोटे गणतन्त्रीय राज्यों की सेनाएँ भी इतने उत्साह से लड़ीं कि सिकंदर की सेना को अहसास हो गया था कि नंदों से टक्कर होने पर उनका क्या हाल होगा।

सिकंदर सारे भारत पर ही विजय पाना चाहता था लेकिन उसे अपने सैनिकों की मर्जी के कारण व्यास नदी से ही वापस लौट जाना पड़ा। वापिस जाते हुए उसे मालव और क्षुद्रक आदि कई वीर हिंदु गणराज्यों से संगठित विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि सिकंदर की योजना जाते – जाते इनके क्षेत्रों को जीतने की थी।

माना जाता है कि इन सभी गणराज्यों को एक साथ लाने में आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान था। इन सभी गणराज्यों ने सिकंदर को काफी क्षति पहुँचाई और उसकी सेना के हौसले पस्त कर दिए।

8. सिकंदर – एक क्रुर और अत्याचारी व्यक्ति

हमारी इतिहास की किताबों में सिकंदर को एक ‘महान योद्धा‘ बताया जाता है और यह भी कि उसने पोरस को युद्ध में हरा दिया था और उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसका राज्य वापिस कर दिया था।

पर इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने कभी भी उदारता नहीं दिखाई। वह एक अत्यंत अत्याचारी और शराबी व्यक्ति था। उसने अपने अनेक सहयोगियों को उनकी छोटी सी भूल के लिए तड़पा – तड़पा कर मार डाला था।

एक बार किसी छोटी सी बात के उसने अपने सबसे करीबी मित्र क्लीटोस को मार डाला। अपने पिता के मित्र पर्मीनियन को भी मरवा दिया। उसने अपने गुरू अरस्तू के भतीजे कलास्थनीज़ को मारने में भी संकोच नहीं किया।

प्रसिद्ध इतिहासकार एर्रियर लिखते हैं – जब बैक्ट्रिया के राजा बसूस को बंदी बनाकर लाया गया, तब सिकंदर ने उनको कोड़े लगावाए और नाक – कान कटवा कर बाद में हत्या करवा दी।

क्या ऐसा क्रुर सिकंदर, महान पोरस के प्रति उदार हो सकता था? अगर सिकंदर पोरस से जीता होता तो क्या वह उन्हें उनका साम्राज्य वापिस करता?

सच बात तो यह है कि सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध को उसके चापलूस लेखकों ने उसकी जीत में बदल कर एक कहानी गढ़ दी और सिकंदर को महान करार दे दिया।

9. सिकंदर की मृत्यु

sikandar in hindi

अपने विश्व विजय के सपने के टूटने के बाद सिकंदर अत्याधिक शराब पीने लगा और उदास रहने लगा।

सिकंदर भारत में लगभग 19 महीने रहा। जब वह बेबीलोन (ईरान) पहुँचा तो 323 ईसवी पूर्व में 33 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। उसकी मौत का कारण मलेरिया बताया जाता है।

निष्कर्ष

सिकंदर की सच्चाई जानने के बाद पता चलता है कि वह कोई विश्व विजेता नहीं था और ना ही महान। सिकंदर से भी कई गुणा ज्यादा क्षेत्र चंगेज़ खाँ और अन्य राजा जीत चुके थे। उसने पृथ्वी के मात्र 5 फीसदी हिस्से को जीता था।

इसमें कोई शक नहीं कि सिकंदर एक कुशल योद्धा था और इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है पर ऐसी कोई वजह नहीं कि उसे ‘विश्व – विजेता‘ कहा जाए या उसके नाम के साथ ‘महान‘ लगाया जाए।

क्या एक क्रुर और हत्यारा व्यक्ति महान कहलाने के लायक है ?

128 Comments

  1. nisha saini
  2. Ramakrishna
  3. Arvind
  4. nilesh
  5. Rahul thakur
  6. hanuman
  7. md shakil akhtar
  8. Rajat Chaurasia
  9. Farzeen
  10. Anurag
  11. Yash Varman
      • Yash Varman
          • Yash Varman
  12. Balram
  13. Mani Ranjan
  14. S Kumar
  15. Ali moazzam khan
  16. Rohitroy
  17. SHAIFALI KHANDELWAL
  18. Amit mahajan
  19. Mohan Bhardwaj
  20. lusifer khan
    • sharad
    • kaal
    • sachin bind
  21. Ravi kumar
  22. Akhil Sukumar Kasana
  23. varsha rathod
  24. Rupesh Kumar
  25. Rakesh Jangir
  26. Digital Khabar
  27. Abhimanyu Rajpoot
    • अभी
        • Rohitroy
      • Mohan Bhardwaj
        • Yash Varman
          • Adarsh Singh Rajput
    • SACH IN
    • ashi
    • Ali moazzam khan
      • Yash Varman
    • Rajput
  28. सरफराज अली
    • Somatmal Sankhala
    • ismail
    • Rohitroy
    • Kapil
  29. karan sur
  30. arif
  31. anil binjhekar
      • राम
  32. akshay jadhav
  33. Himansu
  34. ASHESHSHYAAM
  35. prince dev
      • जगदीश प्रसाद अग्रवाल
    • varsha rathod
    • Yash Varman
  36. Priya Gorait
      • Swati singh chauhan
  37. M- Raza Afridi
    • Yash Varman
        • Yash Varman
        • Yash Varman
  38. RAM
  39. Pankaj mishra
  40. shiv
  41. Anonymous
  42. Indra
    • RAM
      • Yash varman
          • Yash Varman
          • Yash Varman
      • Faheem khan Faheem
      • Spsingh
        • Ram kumar
  43. AB
  44. alfaz
      • RAM
      • Yash Varman
      • Hemant Singh
    • Mohit
      • Yash Varman
  45. chandramani
  46. Sikandar
    • arzoo aman
    • सैफुद्दीन
  47. अजय सिंह
  48. Golu
      • Ashwani kashyap
  49. आशीष भोयर
  50. शोभ नाथ पाल
  51. adil
    • Anonymous
  52. Kabeer adbord
    • Mohit
  53. NANDAN KEVAT

Leave a Reply