इतिहास Archive

सम्राट अशोक के चतुदर्श शिलालेख या 14 शिलालेख वाली चट्टानों पर क्या लिखा है?

सम्राट अशोक के शिलालेखों के बारे में हमने आपको जानकारी देते हुए बताया था कि उनके शिलालेखों को 5 भागों में बांटा गया है जिनकी जानकारी हम आपको आपको अलग-अलग 5 लेखों में देंगे। सो इस लेख में हम आपको पहली प्रकार के शिलालेखों के बारे में जानकारी देंगे जिन्हें चतुदर्श शिलालेख, 14 शिलालेख वाली

सम्राट अशोक के शिलालेख कहां-कहां हैं और कितने प्रकार के हैं?

मौर्य साम्राज्य के आखरी महान सम्राट अशोक द्वारा 269 ईसापूर्व से 232 ईसापूर्व तक के अपने शासनकाल में चट्टानों और पत्थर के स्तंभों पर कई नैतिक, धार्मिक और राजकीय शिक्षा देते हुए लेख खुदवाए गए थे, जिन्हें अशोक के अभिलेख या अशोक के शिलालेख कहा जाता है। शिलालेख उन लेखों को कहा जाता है जो

छत्रपति शिवाजी महाराज का सूरत पर पहला हमला जिसने औरंगज़ेब की नींद उड़ा दी

सन 1661 से 1663 तक मुगल फौज़ ने शाइस्ता खाँ की अगुवाई में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य को बहुत नुकसान पहुँचाया था। गांवो के गांव जला दिए थे और कई लोगों की हत्या कर दी थी। शिवाजी ने अप्रैल 1663 की एक रात को शाइस्ता खाँ पर अपने 400 साथियों के साथ हमला करके

छत्रपति शिवाजी महाराज का शाइस्ता खाँ पर रात को सर्जीकल स्ट्राइक

मराठा इतिहास के कुछ पहले भागों में हम आपको बता चुके है कि औरंगजेब 1659 में अपनी दूसरी ताजपोशी के बाद अपने मामा शाइस्ता खाँ को दक्षिण का वायसराय नियुक्त करता है जिसका प्रमुख काम होता है छत्रपति शिवाजी महाराज को हराना। शाइस्ता ख़ान पुणे और चाकन के युद्ध के बाद 1661-63 में शिवाजी के

1661-63 में शिवाजी की लड़ाईयां और मुगलों से संघर्ष

जुलाई-अगस्त 1660 में पन्हाला और फिर चाकन का किला मुगलों के कब्ज़े में आ जाने से शिवाजी को काफी नुकसान हुआ था। 1660 के आखरी तीन-चार महीने उन्होंने अपना समय बिना किसी लड़ाई के चुपचाप राजगढ़ में बिताया। इस समय में उन्होंने अपनी सेना को संगठित किया और आगे की योजनाएं बनाई। उधर भले ही

पानीपत का युद्ध कब हुआ था? Panipat Wars in Hindi

पानीपत का युद्ध : पानीपत हरियाणा का एक शहर है जो अपने तीन ऐतिहासिक युद्धों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। पानीपत के तीनों युद्ध भारतीय इतिहास के दो बड़े साम्राज्यों – मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश साम्राज्य के उत्थान का कारण बने थे जिन्होंने भारत के एक बड़े हिस्से पर दो-दो सौ साल तक राज किया।

शाइस्ता खाँ का पुणे पर कब्ज़ा और चाकन का युद्ध | Maratha History

1659 ईस्वी में जब औरंगज़ेब ने अपनी दूसरी ताजपोशी की रस्म पूरी की तो उसने शाइस्ता खाँ को दक्षिण का वायसराय नियुक्त किया। औरंगजेब ने शाइस्ता खाँ को जो काम सौंपे थे उनमें से सबसे बड़ा था शिवाजी पर काबू पाना। शाइस्ता खाँ ने शिवाजी की विरोधी आदिलशाही सल्तनत जिसे बीजापुरी जा कर्नाटकी सल्तनत भी
error: Content is protected !!