इतिहास Archive

सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि के बारे में 10 जरूरी बातें | Indus Valley Script in Hindi

सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि जिसे हड़प्पा लिपि भी कहा जाता है, वो सांकेतिक चिन्ह हैं जो कि इस सभ्यता के पुरातत्व स्थलों की खुदाई के दौरान मिलने वाली पत्थर की मोहरों और अन्य वस्तुओं पर मिले हैं। यहां आपको सिंधु घाटी की लिपि से जुड़ी 10 जानकारियां दी जाएंगी। 1. सिंधु लिपि का सबसे

भारतीय इतिहास के रोचक तथ्य। भाग 2

1. प्राचीन भारत में कागज़ की मुद्रा की जगह सिक्के चलते थे। ये सिक्के तांबे, चांदी और सोने के बने होते थे। आज हमारे पास जो प्राचीन भारत के सिक्के हैं, उनमें से ज्यादातर खुदाई में प्राप्त हुए हैं। 2. मुहरों, स्तंभों, स्तूपों, चट्टानों, ताम्र पत्रों और मंदिरों की ईंटों और मूर्तियों पर लिखे गए

भारतीय इतिहास के रोचक तथ्य। भाग 1

1. हिंदु महाकाव्यों और पुराणों में भारत को ‘भारतवर्ष’ कहा गया है, जिसका अर्थ है – ‘भरत का देश’। इन्हीं ग्रंथों में यहां के निवासियों को ‘भारत संतति’ कहा गया है अर्थात् ‘भरत की संतान’। 2. कुछ विद्वान जानबूझकर प्राचीन भारत के आर्य और द्रविड़ लोगों को एक दूसरे के शत्रु घोषित करने की कोशिश

चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास 9 तथ्यों में जानें | Chandragupta 1 history in Hindi

चन्द्रगुप्त प्रथम गुप्त वंश के प्रथम प्रसिद्ध शासक थे। उन्होंने अपने दादा श्रीगुप्त और पिता घटोत्कच द्वारा मिली छोटी सी जागीर को एक साम्राज्य में तब्दील किया। ये साम्राज्य आगे चलकर भारत के सबसे बड़े और प्रभावी साम्राज्यों में से एक बना। नीचे सम्राट चन्द्रगुप्त प्रथम से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं जो

प्राचीन भारत की यात्रा करने वाले 5 प्रसिद्ध विदेशी यात्री

प्राचीन समय में बहुत से विद्वान ऐसे थे जो दुनिया भर का ज्ञान हासिल करना चाहते थे। लेकिन आज की तरह सारा ज्ञान इंटरनेट जैसी एक जगह पर मौजूद ना होने के कारण उन विद्वानों को दुनिया भर में घूम-घूम कर चीज़ों की जानकारी हासिल करनी पड़ती थी। ज्ञान हासिल करने की चाह रखने वाले

मेगस्थनीज और उसकी ‘इंडिका’ पुस्तक में भारत का वर्णन | Megasthenes in Hindi

Megasthenes – मेगस्थनीज एक ग्रीक इतिहासकार और विद्वान था जो कि सेल्युकस के राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। माना जाता है कि मेगस्थनीज लगभग 5 साल तक महाराज चंद्रगुप्त के दरबार में राजदूत रहा। ये समय 302 से 298 ईसापूर्व के बीच का था। मेगस्थनीज की इंडिका मेगस्थनीज़ ने

सम्राट अशोक के लघु शिलालेख | Minor Rock Edicts of Ashoka

अगर आपने सम्राट अशोक के शिलालेखों वाला मुख्य लेख पढ़ लिया है तो आपको पता चल गया होगा कि उनके शिलालेखों को 5 भागों में बांटा गया है। पहले प्रकार के शिलालेखों के बारे में जानकारी हम दे चुके हैं और अब दूसरे प्रकार के शिलालेखों के बारे में जानकारी देंगे जिन्हें ‘सम्राट अशोक के
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