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सम्राट अशोक के शिलालेख कहां-कहां हैं और कितने प्रकार के हैं?

मौर्य साम्राज्य के आखरी महान सम्राट अशोक द्वारा 269 ईसापूर्व से 232 ईसापूर्व तक के अपने शासनकाल में चट्टानों और पत्थर के स्तंभों पर कई नैतिक, धार्मिक और राजकीय शिक्षा देते हुए लेख खुदवाए गए थे, जिन्हें अशोक के अभिलेख या अशोक के शिलालेख कहा जाता है। शिलालेख उन लेखों को कहा जाता है जो

सूरत शहर की जानकारी और इतिहास | Surat Information and History in Hindi

सूरत भारत के गुजरात राज्य में स्थित देश का प्रमुख बंदरगाह शहर है जो किसी समय सूर्यपुर के नाम से जाना जाता था। ये गुजरात की आर्थिक राजधानी भी कहलाता है। सूरत क्षेत्रफल के लिहाज़ से भारत का आठवां और आबादी के हिसाब से 9वां सबसे बड़ा शहर है। शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार सूरत

छत्रपति शिवाजी महाराज का सूरत पर पहला हमला जिसने औरंगज़ेब की नींद उड़ा दी

सन 1661 से 1663 तक मुगल फौज़ ने शाइस्ता खाँ की अगुवाई में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य को बहुत नुकसान पहुँचाया था। गांवो के गांव जला दिए थे और कई लोगों की हत्या कर दी थी। शिवाजी ने अप्रैल 1663 की एक रात को शाइस्ता खाँ पर अपने 400 साथियों के साथ हमला करके

छत्रपति शिवाजी महाराज का शाइस्ता खाँ पर रात को सर्जीकल स्ट्राइक

मराठा इतिहास के कुछ पहले भागों में हम आपको बता चुके है कि औरंगजेब 1659 में अपनी दूसरी ताजपोशी के बाद अपने मामा शाइस्ता खाँ को दक्षिण का वायसराय नियुक्त करता है जिसका प्रमुख काम होता है छत्रपति शिवाजी महाराज को हराना। शाइस्ता ख़ान पुणे और चाकन के युद्ध के बाद 1661-63 में शिवाजी के

अगर नया Computer सस्ते में लेना है तो इस पोस्ट को जरूर पढ़ें

दोस्तो, अगर आप एक नया Computer ख्रीदने की सोच रहे है तो इस पोस्ट में दी गई जानकारी आपके काफी काम आ सकती है। Computer ख्रीदते समय हमें लगभग सारी चीजें अलग-अलग तरह की लेनी होती है जिनके बारे में शुरूआत में हमें कोई जानकारी नहीं होती। पर इस पोस्ट से आपकी सारी समस्या खत्म

दुनिया का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी सारस क्रेन | Sarus Crane in Hindi

Sarus Crane / सारस क्रेन जिसे हमारे भारत में सिर्फ सारस जा क्रौंच ही कहा जाता है दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी है जो कि उड़ सकता है। दूसरे शब्दों में उड़ने वाले पक्षिओं में सारस सबसे बड़ा है। जब ये खड़े होते है तो इनकी औसत ऊँचाई 5 से 6 फुट तक होती है।

1661-63 में शिवाजी की लड़ाईयां और मुगलों से संघर्ष

जुलाई-अगस्त 1660 में पन्हाला और फिर चाकन का किला मुगलों के कब्ज़े में आ जाने से शिवाजी को काफी नुकसान हुआ था। 1660 के आखरी तीन-चार महीने उन्होंने अपना समय बिना किसी लड़ाई के चुपचाप राजगढ़ में बिताया। इस समय में उन्होंने अपनी सेना को संगठित किया और आगे की योजनाएं बनाई। उधर भले ही
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