भारतीय इतिहास के रोचक तथ्य। भाग 2

Indian History Facts Hindi

1. प्राचीन भारत में कागज़ की मुद्रा की जगह सिक्के चलते थे। ये सिक्के तांबे, चांदी और सोने के बने होते थे। आज हमारे पास जो प्राचीन भारत के सिक्के हैं, उनमें से ज्यादातर खुदाई में प्राप्त हुए हैं।

2. मुहरों, स्तंभों, स्तूपों, चट्टानों, ताम्र पत्रों और मंदिरों की ईंटों और मूर्तियों पर लिखे गए लेखों या संदेशों को अभिलेख कहते हैं। भारत में सबसे पुराने अभिलेख हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर मिलते हैं जिन्हें अब तक पढ़ा नहीं जा सका है।

3. देश के सबसे पुराने अभिलेख जो पढ़े जा चुके हैं, वो सम्राट अशोक के तीसरी सदी ईसा-पूर्व के अभिलेख हैं। (विस्तार से – सम्राट अशोक के शिलालेख)

4. प्राचीन भारत के तीन प्रमुख संवत् या कैलंडर हैं – (1) विक्रम संवत्, जो कि 57-58 ईसा-पूर्व में आरंभ हुआ था। (2) शक संवत्, 78 ईसवी में आरंभ हुआ। (3) गुप्त संवत्, 319-320 ईसवी में सम्राट चन्द्रगुप्त प्रथम ने शुरू किया।

5. ‘भारतवर्ष’ शब्द का पहला उल्लेख हाथीगुम्फा अभिलेख में मिलता है। उड़ीसा के भुवनेश्वर नामक स्थान से तीन मील दूर उदयगिरि नाम की पहाड़ी है, जिसकी एक गुफ़ा में एक शिलालेख उपलब्ध हुआ है, जो ‘हाथीगुम्फा शिलालेख’ के नाम से प्रसिद्ध है।

6. सिन्धु सभ्यता की खोज़ रायबहादुर दयाराम साहनी ने की थी। कार्बन डेटिंग पद्धति से पता चला है कि ये सभ्यता 2400 से 1700 ईसा-पूर्व के समय में अस्तित्व में रही। यानि कि आज से 4800 से 3700 साल पहले।

7. मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यता के एक अभिलेख में ‘मेलुहा’ नामक एक शब्द का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि ये शब्द सिंधु सभ्यता के लिए ही प्रयोग हुआ है।

8. माना जाता है कि सिंधु घाटी की सभ्यता का शासन वणिक वर्ग के हाथों में था। उत्तर-पश्चिम भारत में रहने वाले वैश्य (बनिए, अग्रवाल) समाज के लोग इनके वंशज हो सकते हैं।

9. कई ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे ये साबित होता है कि सिंधु सभ्यता के लोग भगवान शिव की पूजा करते ते। वर्तमान भारत के सबसे बड़े लेखक श्री अमीश त्रिपाठी जी को तो इस बात में कोई शक ही नहीं है। उनके लिखे नावल आज सबसे ज्यादा पढ़े जाते हैं।

10. उत्तर में स्थित हड़प्पा और दक्षिण में स्थित मोहनजोदाड़ो को विशाल क्षेत्र में फैली सिंधु घाटी की सभ्यता की दो राजधानियां माना गया है।

11. आपको जानकर हैरानी होगी कि हड़प्पा शहर की खुदाई में मिली ज्यादातर वस्तुओं को संभालकर नहीं रखा गया था। ठेकेदारों ने इस स्थान से खोदी गई पत्थर की चीजों का प्रयोग इस क्षेत्र में से गुजरने वाली रेलवे लाइन में कर डाला।

12. भारत में आज टिन नहीं पाया जाता है, लेकिन हमें कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि राजस्थान और बिहार में किसी समय ये धातु पाई जाती थी। लेकिन अत्याधिक प्रयोग के कारण इसके भंडार समाप्त हो गए।

13. भारत में तांबा सबसे पहले उपयोग में लाई जाने वाली धातु थी। शायद इसीलिए इसे हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है।

14. सिंधु सभ्यता के स्थानों की खुदाई में एक मोहर प्राप्त हुई है जिस पर तीन सिर वाले एक देवता का चित्र है और हर सिर पर तीन-तीन आंखें है। ये देवता पशुओं से घिरे एक साधारण से भारतीय मंच पर योगी की मुद्रा में बैठा है। ये देवता भगवान शिव हैं और चित्र के चारों और पशुओं की उपस्थिती शिव के ‘पशुपति’ नाम को सार्थक सिद्ध करती है।

15. सिन्धु सभ्यता की लिपि के 600 से ज्यादा अक्षर हैं जिनमें से 60 ही मूल अक्षर हैं और बाकी के मूल अक्षरों में मात्राएं, अर्ध-अक्षर या अन्य अक्षरों के साथ जोड़कर बनाए जाते थे।

16. महाराभारत को पहले जयसंहिता कहा जाता था। यह दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य (Epic) है।

17. बौद्ध ग्रंथों से हमें जानकारी मिलती है कि 6वीं सदी ईसा-पूर्व में भारत 16 जनपदों में बंटा हुआ था। हांलाकि इस तथ्य को हमें ये मानकर चलना चाहिए कि ये उस समय के भारत के बड़े राज्यों के बारे में कहा गया है क्योंकि हमारे पास कोई ठोस प्रमाण हैं, जो इस बात को साबित करते हैं कि इन 16 जनपदों के सिवाए भी उस समय के भारत में कई और जनपद और गणतंत्र अस्तित्व में थे।

18. भारत में सोने का सबसे पुराना अवशेष 1800 ईसा-पूर्व के आसपास कर्नाटक के एक नवपाषाणयुगीन स्थान से मिलता है।

19. प्राचीन भारत में, विशेषतः उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा और दक्षिण भारत में कई तरह के रत्नों और मोतियों का उत्पादन होता था। ईसा की शुरूआती सदियों में रोमन लोग भारत के रत्नों की ख्रीदने के लिए लालायित रहते थे।

20. किसी समय पूरे उत्तर भारत में घने जंगल पाए जाते थे। इसलिए लकड़ी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थी। प्राचीन भारत में जब पकी हुई ईंटों का इस्तेमाल नहीं होता था, तब लकड़ी के मकान बनाए जाते थे।

Comments

  1. Vivek

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  3. जगदीश कुमार शर्मा

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