वैश्वीकरण क्या है? ख़ास बातें जानें।

वैश्वीकरण, विभिन्न देशों के लोगों, वहां की कंपनियों और सरकारों के बीच अंतर्क्रिया और एकीकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश द्वारा संचालित की जा रही है। Information Technology इसमें काफ़ी सहायता प्रदान कर रही है। वैश्वीकरण के कारण पर्यावरण, संस्कृति, राजनैतिक व्यवस्थाओं, आर्थिक विकास और दुनिया भर के समाजों में रह रहे मानवों के भौतिक जीवन पर ख़ासा प्रभाव पड़ रहा है।

वैश्वीकरण

हालांकि वैश्वीकरण कोई नई चीज़ नहीं है। पिछले हज़ारों सालों से दुनिया के कोने-कोने में बसे लोग एक दूसरे से चीज़े ख्रीद और बेच रहे है जैसे कि मध्य युग में रेशम मार्ग द्वारा चीन, युरोप और भारत के लोगों के बीच होता था। पहले विश्व युद्ध के शुरू होने के साथ ही वैश्वीकरण की प्रक्रिया को काफ़ी धक्का लगा था लेकिन वर्तमान समय में वैश्वीकरण की गाड़ी फिर पटरी पर आ चुकी है।

पिछले कुछ दशकों से नीति और तकनीकी विकास के कारण सीमा पार के व्यापार, निवेश और प्रवास में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से कई जानकारों का मानना है कि संसार एक नए और अच्छे आर्थिक चरण में प्रवेश कर रहा है। साल 1950 से अब तक विश्व व्यापार में 20 गुणा की बढ़ोतरी हुई है और वर्तमान समय में यह बढ़ोतरी काफ़ी तेज़ी से आगे जा रही है।

वैश्वीकरण की वर्तमान लहर उन नीतियों द्वारा चल रही है जिन की वजह से कई अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं का जन्म हुआ है। दूसरे विश्व युद्ध के कुछ सालों के बाद में और ख़ासकर पिछले 2 दशकों के दौरान विभिन्न देशों की सरकारों ने अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को काफ़ी बढ़ावा दिया है। चीन इस लिस्ट में सबसे आगे रहा है। आज चीन में बने उत्पाद पूरे दुनिया में ख्रीदे जाते हैं।

विभिन्न देशों की सरकारों ने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय समझौंते भी किए हैं। दूसरे देशों के बाज़ारों में नए अवसरों का लाभ उठाकार Corporations ने उन देशों में कई कारखानों का निर्माण कर उत्पादन किया है। यह वैश्वीकरण की सबसे बड़ी विशेषता है।

Technology ने वैश्वीकरण के विकास में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Information Technology के विकास ने आर्थिक जीवन को बदल कर रख दिया है। Information Technology ने Globalization की प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाने में काफ़ी सहायता की है।

वैश्वीकरण को लेकर कई तरह के विवाद भी जुड़े हुए हैं। वैश्वीकरण के समर्थकों का मानना है कि इसकी वजह से गरीब देशों के नागरिकों को आर्थिक रूप से मज़बूत होने और अपना जीवन स्तर उँचा उठाने का मौका मिला है जबकि इसके विरोधी यह तर्क देते है कि इसकी वजह से केवल पश्चिमी देशों और उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही फायदा हुआ है जबकि स्थानीय लोगों को इस वजह से शोषण का शिकार होना पड़ा है।

अगर वैश्वीकरण के भारत पर प्रभाव की बात करें तो यहां भी इसके पक्ष और विपक्ष में कई लोग खड़े हैं। लेकिन एक बात जरूर है कि वैश्वीकरण के कारण भारत के बहुत से लोगों को जरूर फायदा हुआ है। जैसे कि अगर आप इस लेख तक गूगल के जरिए सर्च करके आए हैं तो यह भी वैश्वीकरण का ही नतीजा है। गूगल अमेरिका की एक कंपनी है जिसने भारत में हज़ारो करोड़ो का निवेश करके अपने और भारत के कई लोगों को रोज़गार दिया है। लेकिन भारत की ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो गूगल को टक्कर दे सके। फेसबुक और वाट्सएप के बारे में भी हम यहीं कह सकते हैं।

अगर भारत ने वैश्वीकरण के माहौल को अपने पक्ष में करना है तो हमें जरूरत है कि हम चीन और हमारे बीच होने वाले व्यापारिक अंतर को कम करें। साल 2012 में चीन और भारत के बीच आपसी व्यापार 66 अरब डॉलर का था। चीन ने भारत को लगभग 48 अरब डॉलर का सामान बेचा तो वहीं भारत ने चीन को केवल 18 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया।

आपके घर में जितना भी इलेक्ट्रिकल और डिजिटल सामान होगा शायद वो चीन में ही बना होगा। हमें जरूरत है कि हम Make in India के तहत ऐसे सामानों का उत्पादन खुद शुरू करें और वैश्वीकरण की प्रक्रिया में उपभोगता नहीं बल्कि उत्पादक बनकर उभरें।

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Comments

  1. Laxmi Kumari

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  2. कबीर

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