सिकंदर की 8 सच्चाईयां जो उसके विश्व विजेता होने के भ्रम को तोड़ देगीं।

सिकंदर के बारे में – About Alexander The Great in Hindi

sikandar

शायद सिकंदर इतिहास का पहला राजा था जिसने पूरी दूनिया को जीतने का सपना देखा। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वह ग्रीस से मिस्त्र, सीरिया, बॅक्ट्रिया, ईरान, अफ़गानिस्तान और वर्तमान पाकिस्तान को जीतता हुआ व्यास नदी तक आ पहुँचा।

इतिहास में भले ही यह पढ़ाया जाता है कि सिकंदर की सेना लगातार युद्ध करके थक चुकी थी और आगे और युद्ध नही लड़ना चाहती थी। इस बात में थोड़ी बहुत सच्चाई हो सकती है परंतू असली वजय तो यह थी कि व्यास नदी के आगे हिंदू गणराज्यों और जनपदों ने उसकी एक ना चलने दी और उसे वापिस जाने पर मज़बूर कर दिया।

सिकंदर के विजयी अभियान को दौरान उसके इतिहासकार उसके साथ रहते थे जो उसकी सफ़लताओं को बढ़ा – चढ़ा कर लिख देते ते, अत्याचारों को छुपा देते थे और हारों को जीत में बदल कर लिख देते थे।

पर आज हम आपको इस तथाकथित विश्वविजेता के जीवन और युद्धों के बारे में 8 सच्चाईयां बताएंगे जो आपकी नज़र में इसके महान होने के भ्रम को तोड़ देगीं।

1. अपने भाइयों को मारकर बना था राजा

सिकंदर का जन्म 356 ईसवी पूर्व में ग्रीक के मकदूनिया (मेसोडोनिया) में हुआ था। उसका पिता फिलिप मकदूनिया का राजा था जिसने कई शादियां की थी।

336 ईसवी पूर्व में सिकंदर जब 19-20 साल का था तो उसके पिता फिलिप की हत्या कर दी गई। ऐसी भी कहा जाता है कि सिकंदर की मां ओलंपिया ने ही जह़र देकर अपने पति की हत्या करवाई थी।

अपने पिता की मृत्यु के पश्चात सिकंदर ने राजगद्दी पाने के लिए अपने सौतेले और चचेरे भाईयों का कत्ल कर दिया और मकदूनिया का राजा बन गया।

2. अरस्तू ने दिखाया था दुनिया जीतने का सपना

सिकंदर का गूरू अरस्तू था जो एक बहुत ही प्रसिद्ध और महान दार्शनिक था। अरस्तू के महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज पूरी दुनिया में जहां – जहां भी दर्शनशास्त्र, गणित, विज्ञान और मनोविज्ञान पढ़ाया जाता है उसमें कहीं ना कहीं अरस्तू के विचारों जा वैज्ञानिक अनुभवों का उल्लेख जरूर होता है, भले ही एक – आध लाइन में हो।

सिकंदर जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति को निखारने का काम अरस्तू ने ही किया था। कई इतिहासकार मानते है कि वह अरस्तू ही था जिसने सिकंदर के मन में पूरी दुनिया जीतने का सपना जगाया।

इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिकंदर के विजयी अभियान के दौरान अरस्तू का भतीजा कलास्थनीज़ भी एक सेनापति के रूप में उसके साथ गया था।

3. ऐसे की थी विजयी अभियानों की शुरूआत

alexandar in hindi

Sikandar Empire

सिकंदर ने सबसे पहले मक्दूनिया के आसपास के राज्यों को जीतना शुरू किया। मक्दूनिया के आसपास के राज्यों को जीतने के बाद उसने एशिया माइनर (आधुनिक तुर्की) की तरफ कूच किया।

तुर्की के बाद एक – दो छोटे राज्यों को छोड़कर विशाल फ़ारसी साम्राज्य था। फ़ारसी साम्राज्य मिस्त्र, ईरान से लेकर पश्चिमोउत्तर भारत तक फैला था। उल्लेखनीय है कि फारस साम्राज्य सिकंदर के अपने साम्राज्य से कोई 40 गुणा ज्यादा बड़ा था।

फारसी साम्राज्य का राजा शाह दारा था जिसे सिकंदर ने अलग- अलग तीन युद्धों में हराकर उसके साम्राज्य को जीता। परंतु शाह दारा ने सिकंदर से संधि कर ली और अपनी एक पुत्री ऱुखसाना का विवाह उससे कर दिया।

फ़ारसी साम्राज्य जीतने में सिकन्दर को करीब 10 साल लग गए। विजय के पश्चात उसने बहुत भव्य जुलूस निकाला और अपने आपको विश्व विजेता कहलाना शुरू कर दिया क्योंकि फ़ारस को जीतकर वह उस तमाम भूमि के 60 प्रतीशत हिस्से को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक के लोगों की थी।

भारत तक पहुँचते – पहुँचते उसे शाह दारा के इलावा छोटे – छोटे राज्यों, सूबेदारों और कबीलों से भी युद्ध करना पड़ा जिसमें उसकी जीत हुई।

4. सिकंदर का युद्ध कौशल

यह सिकंदर की योग्यता का ही परिणाम था कि उसकी छोटी सी सेना बड़ी – बड़ी सेनाओ को मात दे दिया करती थी। सिकंदर की युद्ध रणनीतियों को आज भी युरोप की किताबों में पढ़ाया जाता है।

सिकंदर के पत्थर और आग के गोले फेंकने वाले गुलेलनुमा बड़े- बड़े हथियार और उसके सैनिकों की लंबी – लंबी ढ़ालें युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाती थी।

कई ऐसे मौकों पर जब सिकंदर की सेना युद्ध में कमज़ोर पड़ती दिखती तो सिकंदर खुद आगे होकर लड़ता जिससे उसकी सेना का मनोबल बढ़ जाता।

सिकंदर की यवन सेना उसे देवता मानती थी।

5. सिकंदर का भारत पर हमला

sikandar

सिकंदर ने भारत पर 326 ईसा पूर्व में हमला किया। उस समय भारत छोटे – छोटे राज्यों और गणराज्यों में बटा हुआ था। राज्यों में राजा शासन करते थे और गणराज्यों के मुखी गणपति होते थे जो प्रजा की इच्छा अनुसार ही फैसले लेते थे।

भारत में सिकंदर का सामना सबसे पहले तक्षशिला के राजकुमार अंभी से हुआ था। अंभी ने सीघ्र ही आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता दी।

सिकंदर अंभी द्वारा भेंट की गई दौलत को देखकर देख दंग रह गया। वह सोच में पड़ गया कि अगर भारत के एक छोटे से राज्य के पास इतनी धन – संपदा है तो पूरे भारत में कितनी होगी ? भारत की धन – संपदा देखकर उसे भारत जीतने की इच्छा ओर बढ़ गई।

इधर तक्षशिला विश्वविद्यालय के एक आचार्य चाणक्य से भारत पर किसी विदेशी का हमला देखा ना गया। चाणक्य ने भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से सिकंदर के विरूद्ध लड़ने का आग्रह किया, परंतू सभी राजा अपनी आपसी दुश्मनी की वजह से एक साथ ना आए।

चाणक्य ने सबसे शक्तिशाली राज्य मगध के राजा धनानंद से भी गुहार लगाई, परंतू उसने चाणक्य का अपमान कर महल से निकाल दिया।

इसके बाद चाणक्य ने गणराज्यों से एक होने की अपील की जिसमें वह काफी सफल रहे, इन गणराज्यों ने वापसी के समय सिकंदर को बहुत नुकसान पहुँचाया।

6. सिकंदर और पोरस का युद्ध

सिकंदर का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध झेलम नदी के तट पर राजा पुरू जा पोरस से हुआ। इस युद्ध को ‘पितस्ता का युद्ध‘ जा ‘हाइडेस्पेस का युद्ध‘ कहा जाता है।

महाराजा पूरु सिंध -पंजाब सहित एक बहुत बड़े भू – भाग के स्वामी थे और अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे।

सिकंदर की सेना को झेहलम नदी पार करके पोरस से युद्ध करना था परंतू वर्षा के मौसम के कारण नदी में बाढ़ आई हुई थी और नदी को पार करना मुश्किल था।

पर रात में किसी तरह यवन सेना नदी के पार पहुँच गई। नदी के उस पार राजा पुरू भी 30,00 पैदल सैनिकों, 4,000 घोड़सवारों, 300 रथों और 200 हाथियों के साथ सिकंदर के स्वागत के लिए त्यार खड़े थे।

सिकंदर ने महाराज पोरस के पास एक संदेश भिजवाया जिसमें पोरस को अधीनता स्वीकार करने को कहा पर पोरस ने ऐसा नही किया।

इसके बाद दोनो सेनाओं में भयंकर युद्ध शुरू हुआ। राजा पुरू जिसे स्वयं यवन 7 फुट से ऊपर का बताते है, अपनी शक्तिशाली सेना के साथ यवन सेना पर टूट पड़े। पोरस के हाथियों ने यूनानियों का जिस भयंकर रूप से संहार किया उससे सिकंदर और यवन घबरा गए।

युद्ध के पहले ही दिन सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली। इस युद्ध के बाद सिकंदर की सेना का मनोबल टूट गया और उसकी सेना ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया क्योंकि अगर वह किसी तरह पोरस से जीत भी जाते तो व्यास नदी के उस पार मगध की 6 लाख सेना से टक्कर ना ले पाते।

सिकंदर ने भी अनुभव किया कि वह पोरस को हरा नही सकेंगे और लड़ाई जारी रख के अपना ही नुकसान कर लेगें। अंतः उसने पोरस को युद्ध रोकने का प्रस्ताव भेजा जिसे पोरस ने मान लिया। अब सिकंदर और उसकी यवन सेना को वापिस जाना था।

इसके बाद सिकंदर को वापिस जाते हुए मालव, क्षुद्रक तथा कठ आदि वीर हिंदु गणराज्यों से संगठित विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि सिकंदर की योजना जाते – जाते इनके क्षेत्रों को जीतने की थी।

माना जाता है कि इन सभी गणराज्यों को एक साथ लाने में चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान था। इन सभी गणराज्यों ने सिकंदर को काफी क्षति पहुँचाई और उसकी सेना के हौसने पस्त कर दिए।

7. सिकंदर – एक क्रुर और अत्याचारी व्यक्ति

हमारी इतिहास की किताबों में सिकंदर को एक ‘महान योद्धा‘ बताया जाता है और यह भी कि उसने पोरस को युद्ध में हरा दिया था और उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसका राज्य वापिस कर दिया था।

पर इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने कभी भी उदारता नही दिखाई। वह एक अत्यंत अत्याचारी और शराबी व्यक्ति था। उसने अपने अनेक सहयोगियों को उनकी छोटी सी भूल के लिए तड़पा – तड़पा कर मार डाला था।

एक बार किसी छोटी सी बात के उसने अपने सबसे करीबी मित्र क्लीटोस को मार डाला। अपने पिता के मित्र पर्मीनियन को भी मरवा दिया। उसने अपने गुरू अरस्तू के भतीजे कलास्थनीज़ को मारने में भी संकोच नही किया।

प्रसिद्ध इतिहासकार एर्रियर लिखते हैं – जब बैक्ट्रिया के राजा बसूस को बंदी बनाकर लाया गया, तब सिकंदर ने उनको कोड़े लगावाए और नाक – कान कटवा कर बाद में हत्या करवा दी।

क्या ऐसा क्रुर सिकंदर, महान पोरस के प्रति उदार हो सकता था? अगर सिकंदर पोरस से जीता होता तो क्या वह उन्हें उनका साम्राज्य वापिस करता?

सच बात तो यह है कि सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध को उसके चापलूस लेखकों ने उसकी जीत में बदल कर एक कहानी गढ़ दी और सिकंदर को महान करार दे दिया।

8. सिकंदर की मृत्यु

sikandar in hindi

अपने विश्व विजय के सपने के टूटने के बाद सिकंदर अत्याधिक शराब पीने लगा और उदास रहने लगा।

सिकंदर भारत में लगभग 19 महीने रहा। जब वह बेबीलोन (ईरान) पहुँचा तो 323 ईसवी पूर्व में 33 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। उसकी मौत का कारण मलेरिया बताया जाता है।

निष्कर्ष

सिकंदर की सच्चाई जानने के बाद पता चलता है कि वह कोई विश्व विजेता नही था और ना ही महान। सिकंदर से भी कई गुणा ज्यादा क्षेत्र चंगेज़ खाँ और अन्य राजा जीत चुके थे। उसने पृथ्वी के मात्र 5 फीसदी हिस्से को जीता था।

इसमें कोई शक नही कि सिकंदर एक कुशल योद्धा था और इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है पर ऐसी कोई वजह नही कि उसे ‘विश्व – विजेता‘ कहा जाए जा उसके नाम के साथ ‘महान‘ लगाया जाए।

क्या एक क्रुर और हत्यारा व्यक्ति महान कहलाने के लायक है ?

Comments

  1. S Kumar

    Reply

  2. mitkari pratik

    Reply

  3. DI PK

    Reply

  4. SHAIFALI KHANDELWAL

    Reply

  5. lusifer khan

    Reply

    • sharad

      Reply

    • kaal

      Reply

    • sachin bind

      Reply

  6. Ravi kumar

    Reply

    • a.b.kashi

      Reply

  7. Akhil Sukumar Kasana

    Reply

  8. varsha rathod

    Reply

  9. Reply

  10. Subhash Kumar Kushwaha

    Reply

  11. hassan

    Reply

    • Reply

      • varsha rathod

        Reply

        • Amit mahajan

          Reply

    • Mohan Bhardwaj

      Reply

  12. Rakesh Jangir

    Reply

  13. subay singh

    Reply

  14. Digital Khabar

    Reply

  15. ugam seju bishala

    Reply

  16. Amarnath kumar

    Reply

  17. Abhimanyu Rajpoot

    Reply

    • Reply

    • अभी

      Reply

      • Reply

        • Rohitroy

          Reply

      • Mohan Bhardwaj

        Reply

    • SACH IN

      Reply

    • ashi

      Reply

    • Ali moazzam khan

      Reply

      • Reply

  18. सरफराज अली

    Reply

    • Reply

    • mohammad Mian

      Reply

    • Somatmal Sankhala

      Reply

    • ismail

      Reply

    • Rohitroy

      Reply

  19. Bijendra Singh

    Reply

  20. SREE RAM PRAJAPATI

    Reply

    • PANKAJ

      Reply

    • Rohitroy

      Reply

  21. sahil usamni

    Reply

    • Reply

  22. karan sur

    Reply

  23. Arun mehra

    Reply

  24. Shyamlal bunkar

    Reply

  25. dheeraj

    Reply

    • Reply

  26. Pathan

    Reply

    • Reply

  27. anil binjhekar

    Reply

    • Reply

      • राम

        Reply

  28. somu bhaiya

    Reply

  29. Sunil yadu

    Reply

  30. akshay jadhav

    Reply

  31. sunil

    Reply

  32. Balwinder

    Reply

  33. lm

    Reply

  34. Reply

    • Reply

      • सरफराज अली

        Reply

  35. सैफुद्दीन

    Reply

    • Reply

      • Himansu

        Reply

      • Gulshan Jahan

        Reply

  36. viraj

    Reply

    • Ali moazzam khan

      Reply

      • Reply

  37. ASHESHSHYAAM

    Reply

  38. prince dev

    Reply

    • Reply

      • ARmaan

        Reply

        • Reply

        • जगदीश प्रसाद अग्रवाल

          Reply

    • varsha rathod

      Reply

  39. Priya Gorait

    Reply

    • Reply

      • babu

        Reply

      • Swati singh chauhan

        Reply

  40. M- Raza Afridi

    Reply

    • Reply

  41. Pankaj mishra

    Reply

    • Reply

  42. shiv

    Reply

    • Reply

  43. Anonymous

    Reply

  44. Anonymous

    Reply

    • arif

      Reply

      • Reply

  45. Indra

    Reply

    • RAM

      Reply

      • Reply

    • RAM

      Reply

  46. arif ahsan azmi

    Reply

    • Reply

  47. Anonymous

    Reply

    • Reply

      • RAM

        Reply

    • AB

      Reply

      • Reply

        • Adesh Zambare

          Reply

    • AB

      Reply

    • Rupesh Kumar

      Reply

  48. alfaz

    Reply

    • Reply

      • RAM

        Reply

  49. Anonymous

    Reply

  50. dada thakor

    Reply

  51. chandramani

    Reply

  52. deepu attri

    Reply

    • Sikandar

      Reply

      • Reply

        • Anju Lamba

          Reply

        • arzoo aman

          Reply

        • RAM

          Reply

        • सैफुद्दीन

          Reply

  53. अजय सिंह

    Reply

    • Reply

  54. Golu

    Reply

    • Reply

      • Ashwani kashyap

        Reply

  55. आशीष भोयर

    Reply

  56. शोभ नाथ पाल

    Reply

    • Reply

  57. adil

    Reply

  58. adil

    Reply

    • Reply

      • adil

        Reply

    • Anonymous

      Reply

  59. Anonymous

    Reply

  60. Raghu

    Reply

  61. NANDAN KEVAT

    Reply

  62. Anonymous

    Reply

  63. Reply

    • Kabeer adbord

      Reply

      • Anonymous

        Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!