” रेशम मार्ग ” के बारे में जानने योग्य 4 बातें

रेशम मार्ग के बारे में – About Silk Road in Hindi

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Silk Road जा रेशम मार्ग कुछ ऐतिहासिक मार्गो (रास्तों) का समूह है जिसके माध्यम से एशिया, युरोप तथा अफ्रीका आपस में जुड़े हुए थे।

रेशम मार्ग की सबसे महत्वपूर्ण शाखा को उत्तर रेशम मार्ग कहते है जो चीन से होकर पहले मध्य एशिया और फिर पूर्वी युरोप तक जाती है। इससे एक शाखा भारत की ओर निकल जाती है।

पोस्ट में जो चित्र ऊपर दिया गया है उसमें लाल रंग में ‘थल रेशमी मार्ग’ को और नीले रंग में ‘संमूद्री रेशमी मार्ग’ को दर्शाया गया है।

1. रेशमी मार्ग क्यों महत्वपूर्ण है?

रेशम मार्ग प्राचीन समय में बहुत महत्वपूर्ण मार्ग था क्योंकि विश्व का ज्यादातर व्यापार इसी मार्ग के जरिए होता था। इस मार्ग द्वारा व्यापार के सिवाए किसी एक प्रदेश के ज्ञान, धर्म, संस्कृति और दौलत के बारे में दूसरे प्रदेशों को पता चला तथा उनका आदान – प्रदान हुआ।

2. रेशम मार्ग का यह नाम क्यों पड़ा?

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रेशम मार्ग‘ का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इस मार्ग द्वारा ज्यादातर रेशम का व्यापार होता था जो चीन से दूसरे देशों को भेजा जाता था। रेशम के सिवाए चीन चाय और चीनी मिट्टी के बर्तन भी दूसरे देशों को भेजता था।

भारत रेशम मार्ग के जरिए गर्म मसाले, हाथीदांत, कपड़े, काली मिर्च और कीमती पत्थर भेजता था और रोम(इटली) सोना, चांदी, शीशे की वस्तुएं, शराब, कालीन और गहने आदि।

3. रेशम मार्ग की लंबाई कितनी है?

रेशम मार्ग के मुख्य हिस्से ‘उत्तर रेशम मार्ग’ की लंबाई लगभग 6500 किलोमीटर थी। यह मार्ग कई शहरों को आपस में जोड़ता था।

ज्यादातर व्यापारी रेशम मार्ग का उपयोग वस्तुओं को एक शहर से दूसरे शहर में पहुँचाने का काम करते थे जहां से सामान हाथ बदल – बदलकर हज़ारों मील दूर चला जाता।

वर्तमान समय में रेशम मार्ग के कई हिस्सों में पक्की सड़क बन चुकी है और रेल लाइन भी बिछाई जा चुकी है।

4. ‘रेशम’ का रोचक इतिहास

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रेशम के कीड़े

रेशम प्राकृतिक प्रोटीन से बना एक रेशा होता है जिससे बहुत ही मुलायम और चमकदार कपड़े बनाए जा सकते है।

रेशम को कुछ कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाया जाता है। इन कीड़ों को ‘पिल्लु‘ कहते है और यह कई प्रकार के होते हैं। चीन में शहतूत पेड़ के पत्तों पर पलने वाले पिल्लु सबसे अच्छे माने जाते है।

रेशम की खोज़ ईसा से भी 4000 साल पहले चीन में हुई मानी जाती है। रेशम का सबसे पुराना नमूना चीन में एक छोटे बच्चे के कंकाल पर मिला है जो लगभग 3630 ईसा पूर्व का बताया जाता है।

समय के साथ ही चीन के लोगो ने रेशम को बड़े स्तर पर त्यार करना सीख लिया और दूसरे देशों को बेचना शुरू कर दिया। लंबे समय तक रेशम बनाने की जानकारी किसी दूसरे देश को नही थी।

प्राचीन चीन में एक नियम यह भी था कि अगर कोई रेशम बनाने की तकनीक किसी दूसरे देश को बताता हुआ पकड़ा गया तो उसे मृत्यु दंड दिया जाएगा।

पर कालांतर रेशम बनाने की जानकारी किसी तरह जापान में पहुँच गई और वहीं से दूसरे देशों को भी रेशम बनाने का ज्ञान मिला।

Tags : Silk Road, Resham Marg

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