शनि ग्रह के बारे में रोचक जानकारी – Shani Graha ki Jankari

Saturn Planet / Shani Graha ki Jankari – शनि ग्रह के बारे में जानकारी

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शनि ग्रह – Planet Saturn – Shani Graha

शनि ग्रह सूर्य से दूरी अनुसार 6वें स्थान पर है और बृहस्पति के बाद यह सबसे बड़ा ग्रह है।

शनि ग्रह की रूपरेखा – Planet Saturn Profile in Hindi

सुर्य से दूरी : 142 करोड़ 66 लाख 66 हज़ार 422 किलोमीटर (9.58 AU)
एक साल : पृथ्वी के 29.45 साल या 10,755.70 दिन के बराबर
एक दिन : 10 घंटे 34 मिनट
द्रव्यमान (Mass) : 5,68,319 खरब अरब किलोग्राम (पृथ्वी से 95.16 गुणा ज्यादा)
ज्ञात उपग्रह : 62
भू-मध्य रेखीय व्यास : 1,20,536 किलोमीटर
ध्रुवीय व्यास : 1,02,728 किलोमीटर
भू-मध्य रेखिए घेरा : 3,62,882 किलोमीटर
सतह का औसतन तापमान : -139°C

शनि ग्रह के बारे में रोचक तथ्य – About Saturn Planet in Hindi

1. शनि ग्रह को पृथ्वी से नंगी आँखो से देखा जा सकता है। यह पृथ्वी पर से सुर्य, चाँद, शुक्र और बृहस्पति ग्रह के बाद सबसे ज्यादा चमकीला दिखता है।

2. शनि ग्रह सबसे ज्यादा चपटा(flat) ग्रह है। इसका ध्रुवीय व्यास इसके भू-मध्य रेखिए व्यास का 90% है। इसका कारण है इसका कम घनत्व और अपनी धुरी के समक्ष तेजी से घूमना।

3. शनि ग्रह मात्र 10 घंटे और 34 मिनट में अपनी धुरी के समक्ष एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस तरह से इसका एक दिन बृहस्पति(9 घंटे 55 मिनट) के बाद बाकी सभी ग्रहों से छोटा होता है।

4. शनि ग्रह का घनत्व बाकी सभी ग्रहों से कम है। द्रव पानी के मुकाबले इसका घनत्व मात्र 0.7 है। शनि ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुणा ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है।

5. शनि ग्रह की आंतरिक और पदार्थिक संरचना लगभग बृहस्पति जैसी ही है। बृहस्पति की तरह ही शनि मुख्य रूप से हाईड्रोजन और हीलीयम से बना हुआ है। इसके सिवा जल, मिथेन, अमोनिया और चट्टानों के कुछ अंश है। बृहस्पति की तरह ही शनि का केंद्रक चट्टानी है और आसपास द्रवित धात्त्तिवक हाईड्रोजन की परत है। इसकी सतह भी गैसीय है।

शनि ग्रह के वलय(छल्ले) – Shani Graha ke Rings

1. शनि ग्रह को इसके बड़े-बड़े छल्लों(वलयों) के कारण बाकी ग्रहों से अनूठा माना जाता है। यह छल्ले है तो बृहस्पति, यूरेनस और नेपच्चुन पर भी पर शनि के छल्ले संख्या और आकार में ज्यादा हैं।

2. गैलीलीयों ने 1610 में शनि को सबसे पहले दूरबीन द्वारा देखा था। उन्होंने शनि के अज़ीब से आकार को देखकर मज़ाक में कहा था कि – “शायद शनि ग्रह के दो कान भी हैं”।। बाद में हुई खोजों से पता चला कि शनि का यह अज़ीब सा आकार उसके वलयों के कारण है।

3. शनि के सभी छल्ले लगभग एक तल पर ही हैं। इसके छल्लों को समझने के लिए इसे 14 मुख्य भागों में बांटा गया है जिनमें से 12 छल्ले है और 2 रिक्त स्थान। यह इस तरह से हैं-

  • D Ring
  • C Ring
  • B Ring
  • Cassini Divison (रिक्त स्थान)
  • A Ring
  • Roche Divison (रिक्त स्थान)
  • F Ring
  • Janus Ring
  • G Ring
  • Methone Ring Arc
  • Anthe Ring Arc
  • Pallene Ring
  • E Ring
  • Phocbe Ring

इन में से A,B और C वलय पृथ्वी से देखे जा सकते हैं। A और B वलय के बीच रिक्त स्थान को कासीनी डीवीजन कहते हैं।

4. शनि के वलय छोटे-छोटे कणों से बने हुए हैं। यह कण मुख्य रूप से पानी की बर्फ के बने हैं पर इनमें चट्टानों के कण भी शामिल हैं। इन कणों का आकार कुछ सेंटीमीटर से लेकर कुछ मीटर तक का है। यह कण अपने छल्ले में रहकर स्वतंत्र रूप से शनि की परिक्रमा करते हैं।

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शनि के वलयों की लंम्बाई और मोटाई की तुलना

5. शनि के छल्लों का व्यास भले ही 2 लाख 82 हज़ार किलोमीटर से ज्यादा है परंतु इनकी मोटाई एक किलोमीटर से भी कम है। इन छल्लों की विशालता की तुलना में पदार्थ की मात्रा बहुत कम है। यदि सभी छल्लों के पदार्थो को एक आकाशी पिंड बनाने में उपयोग किया जाए तो उस पिंड का आकार 100 किलोमीटर से कम होगा।

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Missions to Saturn

अब तक कुल 4 अभियान शनि ग्रह पर जा चुके हैं- Pioneer 11 (पायोनीर 11), वायेजर 1 और 2 और कासीनी। इनका वर्णन इस तरह से हैं –

अभियान–कब भेजा गया–किस द्वारा भेजा गया–शनि की कक्षा में कब स्थापित हुआ

1. पायोनीर 11 — 6 अप्रैल 1973 — अमेरिका — 1 सितंबर 1979
इसने शनि के कुछ छल्लों और उपग्रहों की खोज की जो तब तक अज्ञात थे।

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कासीनी द्वरा टाइटन का लिया गया चित्र (Image Cridit – Nasa)

2. वायेजर 1 — 5 सितंबर 1977 — अमेरिका — 13 नवंबर 1980
इसने शनि के उपग्रहों की 900 तस्वीरें भेजी, छल्लों के बारे में कई जानकारियां दी और इसके उपग्रह टाइटन के वायुमंडल के बारे में जानकारी दी।

3. वायेजर 2 — 20 अगस्त 1977 — अमेरिका — 26 अगस्त 1981
इसने शनि के उपग्रहों की 1150 तस्वीरे भेजी और ग्रह की संरचना के बारे में जानकारी दी।

4. कासीनी — 13 अक्तुबर 1997 — अमेरिका,युरोपियन स्पेस एजेंसी और इटली — 1 जुलाई 2004
इसने कुल 12 बड़ी खोजें की जिन्होंने शनि के उपग्रहों, छल्लों, वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र को समझने में वैज्ञानिकों की सहायता की।

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Tags : Shani Graha , Shani Grah , शनि ग्रह , Saturn Planet in Hindi

Comments

  1. चन्दन कुमार

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